Long Moral stories in hindi

Top 10 Long Moral Stories in Hindi | बच्चों के लिए नैतिक कहानियाँ

Moral Stories in Hindi

In this article, we are providing you with a list of the best long moral stories in Hindi. These moral stories in Hindi can be used in your school project or simply for entertainment.

These moral stories are very interesting and teach you some important moral lessons in your life. By reading these moral stories, you will learn a lot of things.

 

Long Moral Stories in Hindi for Kids

So get ready to dive into the world of moral stories with exciting characters and twist and turns. Below is the list of long moral stories in Hindi.

सोने के सिक्के देने वाले चप्पल (Long Hindi Stories with Moral Values)

Long Hindi Stories with Moral Values

एक समय की बात है एक गांव में राजू नाम का लड़का रहता था। वह अपनी मां के साथ रहता था। एक दिन उसकी मां की तबीयत खराब हो जाती है, लेकिन दवाई खरीदने के लिए उसके पास पैसे नहीं थे।

वह अपने चाचा के पास मदद मांगने के लिए जाता है, लेकिन उसके चाचा उसकी कोई मदद नहीं करते। वह बहुत गिड़गिड़ाता है, लेकिन उसके चाचा उसकी एक भी नहीं सुनते।

वह बहुत परेशान हो जाता है और एक पेड़ के पास जा के बैठ जाता है। जब वह बैठ कर रो रहा होता है, तभी उसके पास वन देवी आती है। वह उससे पूछती है कि “क्यों रो रहे हो?” राजू बोलता है कि “मेरी मां की तबीयत बहुत खराब है। अगर उसके लिए दवाई नहीं लेकर गया तो वह मर जाएगी।”

वह राजू को एक जादुई चप्पल देती है और कहती है कि इसे पहन कर कूदने से तुम्हें एक सोने का सिक्का मिलेगा। पर याद रखना एक बार में एक से अधिक सिक्का मत निकालना, क्योंकि हर बार कूदने के साथ-साथ तुम छोटे होते जाओगे।

उसके बाद एक दिन पूरा आराम करने के बाद, फिर से पहले जैसे हो जाओगे। पर अगर एक से ज्यादा बार कूदे, तो तुम एक मच्छर की तरह छोटे हो जाओगे।

राजू चप्पल पहन कर एक बार कूदता है और उसे एक सोने का सिक्का मिल जाता है। यह देखकर राजू बहुत खुश हो जाता है। वह तुरंत अपनी मां के लिए दवाई लेता है और कुछ फल खरीदता है।

यह बात उसके चाचा को पता लगती है और उसके मन में भी लालच आ जाता है। उनके मन में चप्पल को हथियाने का खयाल आता है। वो राजू से कहते हैं कि यह चप्पल तो मुझे बेंच दो। राजू कहता है कि मैं यह नहीं बेंच सकता, क्योंकि ये मुझे वन देवी ने उपहार में दिया है।

चाचा जी उससे एक दिन के लिए चप्पल को उधार में मांगते हैं। राजू जब उन्हें समझाता है कि “इसे एक बार से ज्यादा उपयोग नहीं करना, नहीं तो छोटे हो जाओगे।” लेकिन चाचा जी उसकी बात नहीं सुनते और वह उसे ले जाते हैं।

घर जाने के बाद वह बार-बार कूदने लगते हैं, जिससे कि बहुत सारे सोने के सिक्के इकट्ठे हो जाते हैं। वह लालच में इतने अंधे हो गए थे, कि उनको पता ही नहीं चला कि वह छोटे होते जा रहे हैं।

थोड़ी देर बाद उनको ध्यान आता है कि सिक्के बहुत बड़े नजर आ रहे हैं। फिर वह घर से बाहर निकल कर देखते हैं तो सारी चीजें बहुत बड़ी दिखाई दे रही होती है। फिर अचानक उनके सामने एक मेढ़क आ जाता है और उन्हें खा जाता है।

जब राजू उनके घर जाता है और देखता है कि उनके घर में बहुत सारे सोने के सिक्के पड़े हुए हैं। राजू समझ जाता है कि चाचा जी मच्छर की तरह छोटे हो गए हैं।

उसी समय वन देवी प्रकट होती है और कहती है कि चाचा जी को मेंढक ने खा लिया। अब यह सोने के सिक्के तुम्हारे हैं। वनदेवी उसे सीख देती है कि “हमेशा सच्चाई की राह पर चलना और जीवन में कभी लालच नहीं करना।” राजू अपना सिर हिलाता है और कहता है मैं ऐसा ही करूंगा।

“हमें अपने जीवन में कभी लालच नहीं करनी चाहिए और जितना हमारे पास है उतने में ही संतुष्ट रहना चाहिए।”

 

लालची बहू (Top 10 Moral Stories in Hindi)

Long Moral Stories in Hindi

एक समय की बात है एक छोटे से गांव में राम और सीता नाम के कपल रहते थे। उनका एक अर्जुन नाम का बेटा था, जिसकी शादी रिया नाम की लड़की से हुई थी।

राम और सीता कड़ी मेहनत करते थे और अपने बुढ़ापे के लिए पैसे बचा थे। रिया बहुत लालची लड़की थी और हमेशा अपने लिए और चीजें चाहती थी।

जैसे-जैसे साल बीतता गया, रिया का लालच और बढ़ता गया। वह अपने पास रखे चीजों से कभी संतुष्ट नहीं रहती थी। वह हमेशा अपने सास-ससुर से महंगे तोहफे मांगा करती थी और उनके बचाये हुए पैसों में से भी कुछ हिस्सा अपने लिए मांगती थी।

राम और सीता बहुत ही अच्छे पेरेंट्स थे, इसलिए उसकी सारी जरूरतों को पूरा करते थे ताकि परिवार में शांति बनी रहे। वह अपने पति अर्जुन के ऊपर भी दबाव डालती थी, कि वह अपने मां बाप से पैसे और संपत्ति मांगे। वह बहुत ज्यादा संपत्ति कट्ठा करना चाहती थी, बिना किसी मेहनत के।

एक दिन राम और सीता ने यह फैसला लिया कि वह रिया को सबक सिखाएंगे।  वह उसे बुलाते हैं और बोलते हैं की “बेटा हमें तुमसे कुछ जरूरी बातें करनी है। हमने यह फैसला लिया है कि हम अपनी जायदाद का कुछ हिस्सा अपने बच्चों में बाटेंगे और उसका कुछ हिस्सा तुम्हे भी देना चाहते हैं.”  रिया ख़ुशी से झूम उठती है क्योंकि वह हमेशा से यही चाहती थी।

लेकिन राम और सीता के मन में कुछ और ही चल रहा था। उन्होंने एक पत्थरों से भरा हुआ बैग उसे दे दिया और बोला, बेटी यह तुम्हारे हिस्से की संपत्ति है।

रिया उस बैग को देखकर गुस्सा हो गई। उसने उस पत्थर से भरे हुए बैग को जमीन पर फेंका और जोर से चिल्लाते हुए बोली कि, ” मेरी मजाक उड़ाने की तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई। मुझे पैसे चाहिए, ये पत्थर नहीं। ”

राम और सीता ने शांत तरीके से उसे समझाया और बोले “रिया, सच्ची संपत्ति सिर्फ पैसे और चीजों के बारे में नहीं है। यह प्यार, दया और जो कुछ भी तुम्हारे पास है, उसके लिए आभारी होने के बारे में है। हमने हमेशा तुमसे प्यार किया है और तुम्हारी देखभाल की है, और यह पैसों से भी अधिक कीमती है.”

रिया को एहसास हुआ कि वह लालच में कितनी अंधी हो गई थी। उसको अपने किये गए बर्ताव के लिए पछतावा होने लगता है। उसने अपने सास और ससुर से माफ़ी मांगी और अपने तरीके बदलने का वादा किया।

उस दिन के बाद से उसमें बदलाव आया और वह एक अच्छी बहू बन गई। रिया के बदलाव की बात पूरे गाँव में फैल गई और सभी ने एक बेहतर इंसान बनने के लिए उसकी प्रशंसा की।

रिया अपने परिवार का ख्याल रखते हुए और उनके बीच मिले प्यार के लिए आभारी होकर हमेशा खुश रहने लगी।

“सच्चा धन प्यार, दया और जो हमारे पास है उसके लिए आभारी होने से आता है, न कि हमेशा और अधिक चीजों की चाह रखने से।”

 

जादुई साड़ी (Long moral stories in Hindi with pictures)

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एक बार की बात है, एक छोटे से गाँव में अनाया नाम की एक महिला रहती थी। वह एक दयालु और अच्छी इंसान थी, जो हमेशा अपने और अपने परिवार के लिए अच्छी चीजें चाहती थी।

अनाया के पास एक प्यारा पति और एक खूबसूरत बेटी थी, लेकिन उसकी सास, शांता, उसके प्रति बहुत अच्छी नहीं थी। शांता अक्सर घटिया बातें कहती थी और अनाया को दुखी करती थी।

एक दिन, जब अनाया बाज़ार में घूम रही थी, तो उसे एक विशेष दुकान मिली। दुकानदार एक बूढ़ा और बुद्धिमान व्यक्ति था। अनाया ने उससे कहा कि वह खुश रहना चाहती है और चाहती है कि उसके साथ अच्छी चीजें हों, भले ही उसकी सास निर्दयी थी।

दुकानदार मुस्कुराया और उसे एक अनोखी साड़ी दिखाई। उन्होंने कहा कि यह जादुई साड़ी है और यह उसके जीवन में सौभाग्य और खुशियां लाएगा।

अनाया ने जादुई साड़ी खरीदने का फैसला किया और तुरंत उसे पहन लिया। जब अनाया ने जादुई साड़ी पहनना शुरू किया तो चमत्कार हो गया। उसकी सास अनाया के साथ बुरा बर्ताव करने की बजाय उसके साथ प्यार और सम्मान से पेश आने लगी।

अनाया बहुत खुश थी क्योंकि उसकी सास उसकी सबसे बड़ी समर्थक और सबसे अच्छी दोस्त बन गई थी। गाँव के लोग इस बदलाव को देखकर आश्चर्यचकित रह गए।

जादुई साड़ी की वजह से अनाया के परिवार में खुशियाँ आने लगीं। गाँव बहुत अच्छी जगह बन गया और अनाया का पति सफल हो गया।

उनका घर हमेशा प्यार से भरा रहता था और सभी का आपस में मेल-जोल रहता था। अनाया की बेटी एक प्यारे और देखभाल करने वाले घर में बड़ी हुई और वह बहुत खुश थी।

जादुई साड़ी की कहानी दूर-दूर तक फैल गई और लोगों को दया और क्षमा का महत्व सिखाया। अनाया बहादुरी का प्रतीक बन गई और उसने सभी को दिखाया कि दयालु होने से बड़ा बदलाव आ सकता है, चाहे चीजें कितनी भी कठिन क्यों न लगे।

और इस तरह, जादुई साड़ी के साथ मिलने वाली अच्छी चीज़ों का आनंद लेते हुए, गाँव हमेशा खुशहाल रहने लगा। साड़ी ने न केवल अनाया की जिंदगी बदली, बल्कि एक महत्वपूर्ण सबक भी सिखाया कि “प्यार और क्षमा मुश्किल समय में भी खुशी और चमत्कार ला सकती है।”

“दूसरों के प्रति दयालु होने से, हम उनके और हमारे जीवन में भी खुशियाँ ला सकते हैं।”

 

लालची राजा (Long moral stories in Hindi for class 9)

एक समय की बात है, एक बड़े से महल में एक राजा रहता था। वह बहुत लालची था। उसके पास बहुत सारे पैसे होने के बावजूद वह उससे संतुष्ट नहीं था।

एक दिन एक बूढ़ा आदमी राजा के महल में आता है। वह राजा को एक अनोखा हीरा दिखाता है और कहता है की इस हीरे से तुम जो कुछ भी मांगोगे वह तुम्हें मिल जाएगा। लेकिन उसने राजा को चेतावनी दी कि हर इच्छा की एक कीमत होगी।

राजा बहुत खुश हो जाता है और हीरे को अपने पास रख लेता है। वह अपनी पहली इच्छा मांगता है कि उसे ढेर सारे सोने के सिक्के मिल जाए। अचानक से उसका कमरा सोने के सिक्कों से भर जाता है।

लेकिन राजा इतने में भी संतुष्ट नहीं होता है उसे और सोना चाहिए होता है। वह और इच्छा मांगता है कि उसे गहने, जमीन और खजाने चाहिए। उसे वह सब भी मिल जाता है।

जैसे-जैसे राजा का लालच बढ़ता जा रहा था, वैसे वैसे उसके राज्य के लोगों को भुगतना पड़ रहा था। वह सब गरीब हो गए, उनकी जमीन बंजर हो गई, क्योंकि हीरे से मांगी गयी इच्छाओं की कीमत उसके राज्य के लोगों को चुकाना पड़ रहा था। लोग गिड़गिड़ाते रहे राजा के सामने कि वह रुक जाए, लेकिन राजा ने उनकी एक न सुनी।

एक रात जब राजा सो रहा था, तब उनके पिताजी सपने में आते हैं और बोलते हैं कि “यह लालच उन सब चीजों को बर्बाद कर देगा, जिनसे तुम प्यार करते हो।” राजा की नींद खुलती है और उसे अपनी गलती का एहसास होता है।

राजा ने सभी लोगों को एक साथ बुलाया और अपने आप को बदलने का वादा किया। उसने अपने धन का उपयोग लोगों की मदद करने और राज्य को बेहतर बनाने के लिए किया। राज्य फिर से सुखी और समृद्ध हो गया।

उस दिन से, राजा ने सीखा कि लालची होने से केवल दुख मिलता है, लेकिन दयालु होने और दूसरों की मदद करने से सभी को खुशी मिलती है।

 “लालच दुःख और विनाश ला सकता है, जबकि दया और निःस्वार्थता सुख और समृद्धि लाती है।”

 

जादुई संतरा (Long moral stories in Hindi for class 10)

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एक समय की बात है, एक गांव में सोनू नाम का एक छोटा सा लड़का रहता था।  उसे घूमने फिरने का और नई चीजें जानने का बड़ा शौक था। एक दिन जब वह जंगल में घूम रहा था, तो उसे एक संतरे का जादुई पेड़ दिखाई देता है।

वह पेड़ बाकी पेड़ों से बिल्कुल अलग दिख रहा था। जब सोनू एक संतरे को चखता है, तो उसे अपने अंदर भरपूर ऊर्जा महसूस होती है और उसका दिमाग पहले से बहुत तेज हो जाता है।

सोनू उस जादुई संतरे का इस्तेमाल अपने खुद के फायदे के लिए करने लगा। उसे हर चीज पहले ही पता चल जाता और हर कठिन से कठिन प्रश्नों को हल कर लेता था। दूर-दूर से लोग उसकी इस प्रतिभा को देखने आते थे।

जैसे-जैसे समय बीतता गया सोनू की शक्तियां कम होती गई। पेड़ पर संतरों की चमक भी कम हो रही थी और धीरे-धीरे उनकी भी शक्तियां खत्म होने लगी थी।

जल्दी ही सोनू को यह एहसास होता है कि, वह अपनी खुद की प्रतिभा को नजरअंदाज करते हुए जादुई संतरे की शक्ति पर बहुत ज्यादा निर्भर हो गया है।

सोनू को अपनी गलतियों का एहसास होता है और वह जादुई संतरे के पेड़ के पास वापस जाता है। वह अपने लालची स्वभाव के लिए माफी मांगता है और वादा करता है कि अपनी काबिलियत का उपयोग वह अच्छे कामों के लिए करेगा। फिर अचानक से पेड़ के बचे हुए संतरों में वापस चमक आ जाती है।

उस दिन के बाद से सोनू यह समझ गया कि असली शक्ति हमारे अंदर ही होती है और हम अपनी खुद की कौशल और प्रतिभा का इस्तेमाल करके ही दुनिया में बदलाव और खुशी ला सकते हैं।

“हमें सफलता प्राप्त करने के लिए किसी जादू या शक्ति के बाहरी स्रोतों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। बल्कि हमें अपनी क्षमताओं को बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए और उनका उपयोग करके दुनिया में सकारात्मक बदलाव लाना चाहिए।”

 

लालची दूधवाला (long moral stories for adults in hindi)

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एक समय की बात है, एक छोटे से गांव में रवि नाम का एक दूधवाला रहता था। वह अपने लालची स्वभाव के लिए जाना जाता था। उसके पास एक गाय थी जो पूरे गांव में सबसे स्वादिष्ट और अधिक मात्रा में दूध दे दी थी। हर सुबह वह दूध निकालता और गांव के लोगों तक पहुंचाता था।

एक दिन रवि को यह एहसास हुआ कि गांव वालों को उसके गाय का दूध बहुत पसंद आ रहा है। इस बात से उसे बहुत खुशी होती है और उसके लालची दिमाग में एक उपाय आता है। वह सोचता है कि “अगर मैं दूध में पानी मिला दूं तो मैं अपना मुनाफा बढ़ा सकता हूं और किसी को पता भी नहीं चलेगा।”

उस दिन के बाद से रवि गांव वालों को दूध पहुंचाने से पहले उसमें पानी मिला देता था। उसे लगने लगा था कि वह बहुत चालाक हो गया है और उसके इस काम के बारे में किसी को नहीं पता चलेगा। फिर भी, गांव वालों को दूध के स्वाद में बदलाव नजर आता है क्योंकि उसका स्वाद अब पहले जैसा नहीं था।

जल्द ही, रवि के दूध में पानी मिलाने की खबर पूरे गांव में फैल जाती है। लोग शिकायत करने लगते हैं और उसके दूध का बहिष्कार करते हैं। लोगों को बहुत गुस्सा आता है क्योंकि उन्हें लगता है कि उन्होंने जिस पर भरोसा किया उसी ने उनके साथ धोखा किया है।

रवि के गलत काम की वजह से उसका धंधा नीचे गिरने लगता है। उसे अपनी गलती का एहसास होता है, लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी। उसकी गांव वालों की नजर में जो इज्जत थी वह खत्म हो चुकी थी। गांव वाले अब उस पर भरोसा नहीं कर सकते थे और उसका दूध लेने से मना करने लगे।

अपने किए पर शर्मिंदा होकर रवि ने फैसला किया कि वह अपने काम करने के तरीके बदलेगा। उसने कसम खा ली कि वह एक ईमानदार व्यापारी बनेगा और गांव वालों का भरोसा वापस जीतेगा। रवि ने फिर से गाओं वालों को शुद्ध और बिना मिलावट के दूध देना शुरू कर दिया।

धीरे-धीरे गांव वालों को रवि के काम करने के तरीके में बदलाव नजर आया और उसकी तारीफ करने लगे। उन्होंने उसे माफ कर दिया और फिर से उससे दूध लेना शुरू कर दिया। रवि ने ईमानदारी के महत्व और लालच के परिणामों के बारे में एक जरुरी सबक सीखा।

उस दिन के बाद से रवि एक ईमानदार दूधवाले के नाम से जाना जाने लगा। उसे उसकी खोई हुई इज्जत और गांव वालों का भरोसा वापस मिल गया। उसका धंधा फिर से चलने लगा। उसे समझ आ गया कि असली सफलता, ईमानदार होने और ईमानदारी से दूसरों की सेवा करने से आती है।

“लालच से अस्थायी लाभ हो सकता है, लेकिन यह अंततः भरोसे को खत्म कर देता है। हालाँकि, ईमानदारी और निष्ठा लंबे समय तक चलने वाली सफलता और सम्मान की कुंजी है।”

 

जादुई चश्मा: दयालुता की एक कहानी (long moral story in hindi)

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एक समय की बात है, एक छोटे से गांव में समीर नाम का लड़का रहता था। उसे नई-नई चीजें खोजने का बहुत शौक था। एक दिन वह अपने दादाजी के कमरे में खोजबीन कर रहा था, तब उसे एक धूल में सना हुआ पुराना बक्सा मिलता है।

समीर जब उत्सुक होकर उस बक्से को खोलता है, तो उसे एक अजीब तरह से दिखने वाला चश्मा मिलता है। वह चश्मा बाकी चश्मों से बिल्कुल ही अलग था। समीर उस चश्मे को पहनता है और कुछ चमत्कार होता है।

उस चश्मे में जादू था। जब समीर ने उस चश्मे के जरिए अपने आसपास की चीजों को देखा तो सब कुछ बदल गया। मामूली से दिखने वाले फूल, रंगीन दिखने लगे। पेड़ जो कमजोर हो गए थे, वह मजबूत लगने लगे। लोगों के चेहरे में खुशी नजर आती थी, भले ही वह कैसे भी दिखते हों।

समीर ने फैसला किया कि वह अपने खास चश्मे की जादू को दुनिया के साथ बाटेगा। वह आस-पास के गांवों में घूमता है जहां पर लोग बहुत ही उदास थे और वहाँ कोई अच्छाई नहीं बची थी। समीर एक ऐसे गांव में जाता है, जो लालच और स्वार्थ से भरा हुआ था।

समीर ने उस गांव में जाने के बाद देखा कि लोग दुखी हैं और एक बेहतर जीवन चाहते हैं। समीर अपना जादुई चश्मा पहन कर शहर के चौराहे पर खड़ा हो गया और उन्हें उन सब चीजों के बारे में बताया जो उसने खुद देखा था।

लोगों के मन में उत्सुकता थी, वह उस जादुई चश्मे का खुद उपयोग करना चाहते थे। एक-एक करके जब वह चश्मा पहनने लगे तो उनके लिए दुनिया का नजरिया ही बदल गया। वह गांव जो कभी उदास था, वह खुश दिखने लगा।

लालची लोग भी दरियादिल बन गए और स्वार्थी लोग दया दिखाने लगे। गांव फिर से खुशहाल जगह बन गया और हर कोई एक दूसरे से जुड़ा हुआ महसूस करने लगा।

जादुई चश्मे की खबर दूर-दूर तक फैल गई। जादू का अनुभव लेने के लिए दूर-दूर से लोग समीर के गांव आने लगे। दुनिया एक बेहतर जगह बन गई, क्योंकि लोगों ने हर चीज़ और हर किसी में अच्छाई देखना शुरू कर दिया था।

लेकिन समीर को एहसास हुआ कि असली जादू चश्मे में नहीं था। असली जादू हर उस इंसान के अंदर था, जो उसकी उम्मीद कर रहा कर रहा था। चश्मा लोगों को बस याद दिलाता है की हमें दयालु और बेहतर इंसान बनना है।

जैसे-जैसे समय बीतता गया, जादुई चश्मे की वजह से हर जगह एक बड़ा बदलाव आने लगा। लेकिन अब चश्मे की आवश्यकता नहीं थी। दुनिया बदल गई थी और लोगों ने उनके बिना भी प्रेमपूर्ण और दयालु होना सीख लिया था।

“दूसरों के प्रति दयालु होना और उनकी भावनाओं को समझना, दुनिया को सभी के लिए एक बेहतर जगह बना सकता है।“

 

सपनों का दरवाजा (Hindi long moral stories with Pictures)

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एक समय की बात है, घने जंगलों के बीच एक छोटा सा गांव था। उस गांव में एक अनोखा दरवाजा था। वह दरवाजा कोई आम दरवाजा नहीं था। उसमें बहुत सी शक्तियां थी और आश्चर्यजनक चीजें कर सकता था।

दूर-दूर से लोग उस दरवाजे को देखने आते थे, क्योंकि उन्होंने सुना था कि उसमें कुछ जादुई शक्तियां हैं। वह सब इस उम्मीद में आते थे कि उनका भी सपना पूरा हो जाएगा और जो चाहते है वो उन्हें मिल जायेगा।

उन्हीं में से एक लड़की थी जिसका नाम ममता था। वह भी उस जादुई दरवाजे को देखना चाहती थी। वह बहुत उत्सुक थी यह जाने के लिए कि वह दरवाजा क्या कर सकता है। इसलिए वह भी उस गांव के लिए निकल पड़ती है।

जब माया वहां पहुंची तो उसने देखा कि दरवाजे के आगे बहुत सारे लोग लाइन लगाकर खड़े हुए हैं। सभी अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे और वह सब अपनी इच्छाओं को पूरी करना चाहते थे। लेकिन माया को लगा कि दरवाजे के अंदर सिर्फ चीजें पानी के अलावा और भी कुछ है।

जब माया की बारी आई तो उसने धीरे से दरवाजा खोला और देखा कि अंदर से एक तेज रोशनी आ रही है। उसने खजाना और शोहरत खोजने के बजाय, कुछ और भी बेहतर खोजा। दरवाजे ने उससे धीमी आवाज में बात की और उसे एक राज की बात बताई।

दरवाजे ने उसे यह बताया कि असली शक्ति चीजें देने में नहीं, बल्कि लोगों को उनकी क्षमताओं को खोजने में मदद करने में है। उसने कहा कि हम सब के अंदर एक जादू है, जो हमें खास बनाता है।

ममता उस दरवाजे का रहस्य जानकर बहुत खुश हुई और वह अपने गांव लौट आई। उसने सभी को उस दरवाजे के बारे में बताया और उससे मिली सीख को सभी को सिखाया। उसने सभी को अपने अंदर झाँकने और अपने अंदर के जादू को खोजने के लिए प्रोत्साहित किया।

गांव के लोगों ने ममता की बात सुनी और एक दूसरे की मदद करना शुरू कर दिया। उन्हें यह एहसास हुआ कि खुश रहने के लिए किसी जादुई दरवाजे की जरूरत नहीं है। उन्हें बस खुद पर भरोसा करने और खुद की प्रतिभा को खोजने की जरुरत है।

“असली जादू हमारे अंदर से आता है। हम सभी के अंदर कुछ खास है, और जब हम खुद पर विश्वास करते हैं और दूसरों की मदद करते हैं, तो हम दुनिया को एक बेहतर जगह बना सकते हैं।”

 

FAQs related to Long Moral Stories in Hindi

यह कहानियाँ हैं जो हमें अच्छा बनने और सही काम करने के बारे में महत्वपूर्ण सबक सिखाती हैं। वे हिंदी में लिखे गए हैं और उनमें बहुत सारे पात्र और घटनाएँ हैं।
हाँ, बच्चे नैतिक कहानियाँ बिलकुल पढ़ सकते हैं। वे विशेष रूप से बच्चों के लिए दया, ईमानदारी और बहादुरी जैसे अच्छी बातें सीखने के लिए लिखे गए हैं।
हाँ बिलकुल, यह कहानियाँ बच्चे ही नहीं बल्कि बड़े भी पढ़ सकते हैं। ये कहानियाँ हमें महत्वपूर्ण सबक सिखाती हैं जो हर किसी पर लागू होती हैं, चाहे वे बच्चे हों या बड़े।

 

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